सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों (हाईवे) पर यात्रा करना महंगा हो गया है। केंद्र सरकार के तहत काम करने वाली National Highways Authority of India (NHAI) और राज्य की एजेंसी Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority (UPEIDA) ने टोल टैक्स की दरों में संशोधन करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। यह बढ़ोतरी हर साल की तरह इस बार भी 1 अप्रैल से प्रभावी हुई है, जिससे लाखों यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ा है।
📊 कितनी बढ़ी टोल दरें?
नई दरों के अनुसार, यूपी के विभिन्न एक्सप्रेसवे और हाईवे पर टोल टैक्स में औसतन 1.5% से 10% तक की बढ़ोतरी की गई है। एक्सप्रेसवे पर यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम (1.5%–3.5%) है, जबकि नेशनल हाईवे पर 5% से 10% तक का इजाफा देखा गया है। यह बढ़ोतरी दूरी और वाहन की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग लागू होती है।
🚗 किन वाहनों पर कितना असर?
टोल बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा चार पहिया वाहनों (कार, एसयूवी) और भारी वाहनों पर पड़ा है। हालांकि दोपहिया वाहनों पर भी मामूली वृद्धि की गई है। उदाहरण के तौर पर:
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कार के लिए टोल ₹665 से बढ़ाकर ₹675 कर दिया गया है।
वहीं दोपहिया वाहनों के लिए यह ₹330 से बढ़कर ₹335 प्रति फेरा हो गया है।
इसी तरह अन्य एक्सप्रेसवे पर भी ₹5 से ₹20 तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। भले ही यह राशि छोटी लगे, लेकिन नियमित यात्रा करने वालों के लिए यह मासिक खर्च को काफी बढ़ा सकती है।
🛣️ प्रमुख एक्सप्रेसवे पर नई दरें
यूपी के प्रमुख एक्सप्रेसवे जैसे यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर नई टोल दरें लागू हो चुकी हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल दरें प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय होती हैं। यहां कार के लिए लगभग ₹2.9 से ₹3 प्रति किमी और दोपहिया के लिए ₹1.5 प्रति किमी तक का शुल्क लिया जा रहा है।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर कार के लिए लगभग ₹295 और दोपहिया के लिए ₹145 प्रति फेरा तय किया गया है।
हालांकि, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे इन मार्गों पर यात्रा करने वालों को राहत मिली है।
हर साल क्यों बढ़ता है टोल?
टोल दरों में यह वृद्धि एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
महंगाई (Inflation) का प्रभाव
सड़क रखरखाव और मरम्मत की लागत
नई सुविधाओं और सुरक्षा उपायों पर खर्च
दरअसल, टोल दरें नेशनल हाईवे फीस रूल्स 2008 के तहत हर साल 1 अप्रैल को संशोधित की जाती हैं। इसमें थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर वृद्धि तय होती है।
आम जनता पर असर
इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। खासकर वे लोग जो रोजाना ऑफिस आने-जाने के लिए एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करते हैं, उनके मासिक खर्च में इजाफा होगा। इसके अलावा:
ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत बढ़ेगी
माल ढुलाई महंगी हो सकती है
इसका असर धीरे-धीरे वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है
व्यापार और परिवहन पर प्रभाव
टोल बढ़ने से ट्रक और कमर्शियल वाहनों का खर्च बढ़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर प्रभावित होगा। इसका असर ई-कॉमर्स, कृषि उत्पादों की सप्लाई और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
🗣️ सरकार का पक्ष
सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि टोल बढ़ोतरी से मिलने वाली राशि का उपयोग सड़कों की गुणवत्ता सुधारने, सुरक्षा बढ़ाने और नई परियोजनाओं को पूरा करने में किया जाता है। इससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव मिलेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
हालांकि आम जनता इस बढ़ोतरी से पूरी तरह खुश नहीं है। लोगों का कहना है कि पहले ही महंगाई चरम पर है और ऐसे में टोल टैक्स बढ़ने से अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। खासकर रोजाना यात्रा करने वाले लोग इसे लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
✅ निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2026 से लागू हुई नई टोल दरों ने उत्तर प्रदेश में सड़क यात्रा को थोड़ा महंगा जरूर बना दिया है। हालांकि सरकार इसे जरूरी सुधार और विकास के लिए जरूरी कदम बता रही है, लेकिन आम लोगों के लिए यह एक अतिरिक्त खर्च के रूप में सामने आया है। आने वाले समय में इसका असर ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता
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