राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पुलिस ने ₹300 करोड़ से अधिक के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड से जुड़े एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह न केवल भारत बल्कि कई अन्य देशों के लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के समय की सबसे बड़ी साइबर क्राइम ऑपरेशन में से एक माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगता था। आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे, जहां से विदेशी नागरिकों और भारतीयों को फोन करके खुद को बैंक अधिकारी, टेक्निकल सपोर्ट एजेंट या सरकारी अधिकारी बताकर ठगी की जाती थी। कई मामलों में लोगों को डराया जाता था कि उनका बैंक खाता बंद हो जाएगा या उन पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिससे वे घबरा कर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते थे।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और साइबर क्राइम यूनिट को इस गिरोह के बारे में लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने कई हफ्तों तक गुप्त रूप से जांच की। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी निगरानी, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन की मदद से इस पूरे नेटवर्क का पता लगाया।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम समेत कई स्थानों से ऑपरेट कर रहा था। आरोपी किराए के फ्लैट्स में कॉल सेंटर बनाकर काम करते थे, ताकि किसी को शक न हो। जैसे ही पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली, टीम ने एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों की डिटेल्स बरामद की हैं। इसके अलावा कई ऐसे सॉफ्टवेयर और डेटा भी मिले हैं, जिनकी मदद से आरोपी लोगों को फंसाते थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के तार विदेशों से जुड़े हुए हैं और कुछ आरोपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस नेटवर्क को चला रहे थे।
अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक करीब ₹300 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया है। हालांकि, यह आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि जांच अभी जारी है। पुलिस अब इस मामले में मनी ट्रेल को ट्रैक कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई।
दिल्ली पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। बैंक या सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन पर OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी नहीं मांगती हैं। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की कॉल प्राप्त करता है, तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। पुलिस की इस कार्रवाई से जहां एक ओर अपराधियों में डर पैदा हुआ है, वहीं आम लोगों को भी राहत मिली है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
ब्यूरो रिपोर्ट, सावधान नेशन न्यूज़ – मोहिनी कुमारी