सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
गाज़ियाबाद: मेरठ रोड स्थित प्रतिष्ठित DPSG स्कूल में इन दिनों माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन द्वारा बिना अभिभावकों की सहमति के स्कूल का समय अचानक 2 घंटे बढ़ाने के फैसले ने पेरेंट्स के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अपनी मांगों को लेकर शनिवार को स्कूल गेट पर प्रदर्शन करने के बाद, आज सोमवार को सैकड़ों अभिभावक जिला कलेक्ट्रेट (डीएम कार्यालय) जा पहुंचे और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
मुख्य विवाद क्या है?
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू होते ही जूनियर और सीनियर दोनों विंग की टाइमिंग बढ़ाकर सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक कर दी है।
- अभिभावकों की दलील: छोटे बच्चों को 8 से 9 घंटे स्कूल में रहना पड़ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास के लिए ठीक नहीं है।
- प्रबंधन का रवैया: पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। संवाद के बजाय उन्हें स्कूल से TC (Transfer Certificate) ले जाने की सलाह दी जा रही है।
- बसों का बहाना: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, स्कूल ने यह फैसला खुद की बसों की कमी को छिपाने के लिए लिया है, ताकि कम बसों में ही बच्चों को शिफ्ट किया जा सके।
डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन और मांगें
पेरेंट्स ने जिलाधिकारी कार्यालय पर नारेबाजी करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- स्कूल की टाइमिंग को तुरंत पुराने समय पर वापस लाया जाए।
- 8 घंटे से ज्यादा स्कूल चलाने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- शिक्षा विभाग स्कूल की ‘तानाशाही’ पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इंडियन पेरेंट एसोसिएशन ने भी इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है और अधिकारियों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
गाज़ियाबाद के मेरठ रोड स्थित DPSG स्कूल में समय बढ़ाने के विवाद पर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग ने इस मामले में जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, वहीं स्कूल ने अपने फैसले को अकादमिक सुधार का हिस्सा बताया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के बयान
जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित आधिकारिक रुख अपनाया है:
- जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार: उन्होंने अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि “समस्या का समाधान जल्द ही निकाला जाएगा” और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा करने के कारण उन्होंने कुछ अभिभावकों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।
- बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ओ.पी. यादव: उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नियमों के अनुसार स्कूल का समय आमतौर पर 6 घंटे का होता है। उन्होंने बयान दिया कि “अभिभावकों की शिकायतों की समीक्षा की जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उचित कार्रवाई की जाएगी”।
स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल का पक्ष
स्कूल की ओर से आधिकारिक बयान में फैसले का बचाव किया गया है:
- अकादमिक तर्क: स्कूल प्रबंधन के अनुसार, समय बढ़ाने का निर्णय बेहतर अकादमिक कवरेज और संरचित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। उनका कहना है कि यह विस्तार मामूली है और इसे कक्षाओं के बीच 5-5 मिनट के छोटे ब्रेक देकर संतुलित किया गया है।
- प्रिंसिपल का संवाद: आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रिंसिपल अभिभावकों के साथ सक्रिय चर्चा कर रही हैं ताकि किसी सर्वसम्मत समाधान पर पहुंचा जा सके।
- विवादास्पद रुख: हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने शुरू में संवाद के बजाय उन्हें यह तक कह दिया था कि वे चाहें तो अपने बच्चों का TC (Transfer Certificate) ले सकते हैं।
विवाद की वर्तमान स्थिति
अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को शाम 5:30 से 6:30 बजे तक घर पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे उनके स्वास्थ्य और आराम पर असर पड़ रहा है।
“अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद क्या स्कूल प्रबंधन अपने तुगलकी फरमान को वापस लेता है, या नौनिहालों को इसी तरह घंटों स्कूल में पसीना बहाना पड़ेगा। गाज़ियाबाद से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए बने रहिए हमारे साथ ! ,सावधान नेशन न्यूज़।“