सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
नई दिल्ली/देश:
कल, 2 अप्रैल 2026 को देशभर में हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को पवनपुत्र हनुमान का अवतरण हुआ था, जिसे भक्त ‘संकट मोचन’ के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाते हैं।
शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा की शुरुआत 1 अप्रैल को सुबह 7:06 बजे से हो चुकी है, जो 2 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के कारण व्रत और मुख्य उत्सव कल ही मनाया जाएगा।
- सुबह का पूजा मुहूर्त: प्रातः 6:10 बजे से सुबह 7:44 बजे तक।
- सायंकालीन पूजा: शाम 6:39 बजे से रात 8:06 बजे तक।
- विशेष संयोग: इस साल यह पर्व गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु का दिन है। हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त हैं, इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
पूजा विधि और विशेष उपाय
श्रद्धालु इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करते हैं। मंदिरों में बजरंगबली को चोला चढ़ाया जाता है और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।
- भोग: हनुमान जी को लड्डू, गुड़-चना और केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
- सामग्री: पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और जनेऊ का प्रयोग करें।
- फल: ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन किए गए उपायों से शनि दोष और जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है।
मंदिरों में तैयारियां
अयोध्या के हनुमानगढ़ी से लेकर दिल्ली के मरघट वाले बाबा मंदिर तक, सभी प्रमुख तीर्थों पर भक्तों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
सनातन धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का अत्यधिक महत्त्व है क्योंकि यह दिन शक्ति, भक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक भगवान हनुमान के प्राकट्य का उत्सव है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं और वे कलयुग के जागृत देवता माने जाते हैं, जो आज भी पृथ्वी पर सशरीर विद्यमान हैं।
इस जन्मोत्सव को महत्त्व दिए जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- संकटमोचक के रूप में: भक्तों का विश्वास है कि इस शुभ दिन पर हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
- अटूट भक्ति का आदर्श: हनुमान जी भगवान श्री राम के परम भक्त हैं। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
- बल, बुद्धि और विद्या के दाता: वे अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता माने जाते हैं। विद्यार्थी और साधक बुद्धि व ज्ञान की प्राप्ति के लिए उनकी विशेष उपासना करते हैं।
- आत्मशक्ति का जागरण: यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर की आत्मशक्ति और साहस को जगाने का अवसर है।
- धर्म की स्थापना: उन्होंने त्रेतायुग में भगवान राम की सहायता कर अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विशेष तथ्य:
- तिथी: मुख्य रूप से यह पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हालांकि, कुछ स्थानों पर कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे माता सीता द्वारा उन्हें मिले अमरता के वरदान से जोड़ा जाता है।
- पूजा विधि: इस दिन भक्त मंदिरों में दर्शन करते हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करते हैं और बजरंगबली को चोला व सिंदूर अर्पित करते हैं।
“सनातन की शक्ति और केसरी नंदन की भक्ति का यह पर्व हमें अपने भीतर के साहस को जगाने की प्रेरणा देता है। धर्म और राष्ट्र की हर खबर के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।, सावधान नेशन न्यूज।”